ओम् अंगारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्नो भौम प्रचोदयात् ।।

एक मनुष्य अपने सम्पूर्ण जीवनकाल में नवग्रह से प्रभावित होता है ये नौ ग्रह ही मनुश्य के जीवन में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से अच्छे एवं बुरे प्रभाव डालते है, ग्रह की अच्छी स्थिति होने पर जहॉं एक व्यक्ति अपने जीवन में सभी और सहज सफलता प्राप्त करता है तो वही अन्य व्यक्ति को ग्रहो के बुरे प्रभाव के कारण उसे अपने जीवन मे असफलता ही हाथ लगती है । इन्ही नवग्रहो में से शनि के पश्चात मंगल ग्रह का विशेष प्रभाव होता है जो जातक के सम्पूर्ण जीवन पर प्रभाव डालता है । आईये जाने जन्म कुण्डली में मांगलिक दोष कब होता है ? जन्म–कुण्डली के कुल बारह भावों में जब मंगल ग्रह प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अश्टम एवं द्वादश भाव में होता है, जो जातक की कुण्डली मांगलिक दौश युक्त हो जाती है.

उदाहरणार्थ:

मांगलीक दोश जातक के कुण्डली में व्यापार,व्यवसाय, विवाह सम्बन्ध, भाग्य, केरियर एवं स्वास्थ्य इत्यादि पर प्रभाव डालता है ।

कुंडली मिलान

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